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शिक्षकों ने मेहनत की स्याही से लिखी बदलाव की कहानी

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कमजोर बच्चों के लिए चलती है एक्स्ट्रा क्लास, हिचकिचाहट छोड़ मंच पर बच्चे खुलकर रखते हैं विचार..

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शिक्षा विभाग की तरफ से सिद्धार्थनगर जिले के नौगढ़ ब्लॉक के तेतरी बाजार प्राथमिक विद्यालय को अंग्रेजी माध्यम की मान्यता तो मिल गई, लेकिन सुविधाओं की कमी की वजह से बच्चे यहां पढ़ने नहीं आते थे। ऐसे में अध्यापकों ने मिलकर स्कूल की सूरत बदलने की ठानी। प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक शैलेंद्र राय बताते हैं, “इस बार जब जिले के कई स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम किया गया तो हमारा भी स्कूल इसमें शामिल हुआ। नगरीय क्षेत्र में होने के कारण हमारे विद्यालय को ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों के मुकाबले सुविधाएं नहीं मिल पायीं, इसलिए हम अध्यापकों ने मिलकर फैसला लिया कि विद्यालय की स्थिति को सुधारेंगे।”प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक शैलेंद्र राय बताते हैं, “इस बार जब जिले के कई स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम किया गया तो हमारा भी स्कूल इसमें शामिल हुआ। नगरीय क्षेत्र में होने के कारण हमारे विद्यालय को ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों के मुकाबले सुविधाएं नहीं मिल पायीं, इसलिए हम अध्यापकों ने मिलकर फैसला लिया कि विद्यालय की स्थिति को सुधारेंगे।”

बढ़ गया स्कूल में नामांकन

 

कुछ माह पहले की बात करें तो स्कूल में 100 से भी कम बच्चे नमांकित थे, उनमें से भी गिने-चुने बच्चे ही रोज पढ़ने आया करते। आज स्कूल में बच्चों की संख्या 149 हो गई है। स्कूल में बेहतर पढ़ाई और अन्य सुविधाओं की वजह से यह बदलाव दिखा। बच्चों के लिए विद्यालय में जगह कम न पड़े इसलिए नमांकन भी रोक दिए गए हैं।

लाउडस्पीकर से होती है हर सुबह प्रार्थना, सामान्य ज्ञान के सवाल

 
 

विद्यालय के सहायक अध्यापक सुरेन्द्र गुप्ता बताते हैं, “इंग्लिश मीडियम होने के बाद मैं और प्रिंसिपल सर ही यहां पर पुराने रह गए हैं। हमने मिलकर स्कूल में माइक, लाउडस्पीकर का इंतजाम कराया है, जिससे हर सुबह प्रार्थना होती है। उसके बाद असेंबली में ही बच्चों से जनरल नॉलेज के सवाल पूछे जाते हैं। बच्चों को पढ़ने के लिए अच्छा माहौल मिले हमारी यही कोशिश रहती है। बच्चों में आत्मविश्वास बढ़े इसके लिए उन्हें मंच पर बुलाया जाता है। इसके लिए पहले से ही बच्चों को चुने हुए टॉपिक दिए जाते हैं जिसे वे तैयार करके आते हैं और मंच पर सब बच्चों के सामने सुनाते हैं। यह तरीका उन बच्चों के लिए ज्यादा फायदेमंद रहा है जो कक्षा में चुपचाप से रहते थे। अब बच्चे मंच पर बोलते हुए हिचकिचाते नहीं बल्कि खुलकर अपने विचार रखते हैं।”
अध्यापक भी अपनी जिम्मेदारी बखूबी समझने लगे हैं। वे अपना ज्यादा से ज्यादा समय स्कूल में दे रहे हैं। लोगों की सोच बदलने में वक्त जरूर लगा लेकिन जो परिणाम सामने आए हैं वे बेहद सुकून देते हैं। शैलेंद्र राय, प्रधानाध्यापक
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अभिभावक भी समझ रहे अपनी जिम्मेदारी

 

इलाके के लोग जो पहले यह सोचते थे कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई नहीं होती आज वे ही अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूल में करा रहे हैं। प्रधानाध्यापक शैलेंद्र राय बताते हैं, “ग्राम सभा के अंदर सभी अभिभावकों में विद्यालय के प्रति नजरिया बदला है, हमारे ऊपर विश्वास बढ़ा है। इसी का नतीजा है जो कॉन्वेंट विद्यालयों से बच्चे यहां पढ़ने आ रहे हैं।”
विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य भी हैं सक्रिय
विद्यालय प्रबंधन समिति की अध्यक्ष श्रीकांति देवी हफ्ते में एक बार विद्यालय का चक्कर जरूर लगाती हैं। वह बताती हैं, “अब हमारे बच्चे यहां पढ़ते हैं तो हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि स्कूल पर पूरा ध्यान दें, जब भी स्कूल से बुलाया जाता है हम स्कूल पहुंच जाते हैं। स्कूल में गड्ढ़ा था जहां बारिश में पानी भर जाता था। बच्चों को कोई दिक्कत न हो इसलिए सर लोगों ने अपने पैसे खर्च करके पूरे स्कूल में मिट्टी डलवाकर ईंट बिछवा दी है। सभी ने मिलकर स्कूल की जिम्मेदारी उठाई है तो नतीजे बेहतर आएंगे ही।”
कमजोर बच्चों के लिए चलती है एक्स्ट्रा क्लास
विद्यालय में कई ऐसे बच्चे हैं जो पढ़ने में कमजोर हैं, उन बच्चों के लिए छुट्टी के बाद हर दिन एक्स्ट्रा क्लास चलती है, जिससे वो बेहतर ढंग से पढ़ाई कर सकें।

प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की संख्या

 

कुल बच्चे 149

छात्र 88

छात्रा 63

Source: शिक्षकों ने मेहनत की स्याही से लिखी बदलाव की कहानी